फिल्म: नादानियां
निर्देशक: शौना गौतम
कलाकार: इब्राहिम अली खान, दिया मिर्जा, जुगल हंसराज, सुनील शेट्टी, खुशी कपूर, अपूर्व मुखीजा और आलिया कुरैशी
अवधि: 1 घंटा 59 मिनट
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ (4/5)
युवावस्था की मासूमियत, गहरी भावनाओं और दिल को छू लेने वाली प्रेम कहानी को संजोए हुए, नादानियां दर्शकों को पिया और अर्जुन की दुनिया में ले जाती है। इब्राहिम अली खान और खुशी कपूर के मुख्य किरदारों के साथ यह फिल्म प्यार, दिल टूटने और आत्म-खोज की यात्रा को दिखाती है।
कहानी दक्षिण दिल्ली की एक संपन्न परिवार की लड़की पिया (खुशी कपूर) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक व्यक्तिगत संकट का सामना कर रही होती है, जब एक गलतफहमी उसके करीबी दोस्तों को उसके खिलाफ कर देती है।
अपनी छवि सुधारने के लिए वह अर्जुन (इब्राहिम अली खान) को अपना नकली प्रेमी बनने के लिए कहती है। अर्जुन नोएडा से आया एक गंभीर और महत्वाकांक्षी छात्र है। उनकी दुनिया टकराती है, और जो रिश्ता दिखावे के लिए शुरू होता है, वह धीरे-धीरे गहराई में बदल जाता है, जिससे दोनों किरदारों के लिए यह सफर देखने लायक बन जाता है।
इब्राहिम अपने दमदार डेब्यू से प्रभावित करते हैं, जहाँ वे चार्म और इमोशनल इंटेंसिटी का सही संतुलन बनाए रखते हैं। वहीं, खुशी कपूर आत्मविश्वास और संवेदनशीलता का बेहतरीन मिश्रण पेश करती हैं और खासकर भावनात्मक दृश्यों में चमकती हैं। दोनों की केमिस्ट्री सहज और स्वाभाविक लगती है, जो दर्शकों को बांधे रखती है।
फिल्म में आत्म-मूल्य, मुक्ति और आत्म-विकास जैसे विषयों को खूबसूरती से उकेरा गया है। सिनेमेटोग्राफी, प्रोडक्शन डिजाइन और एडिटिंग फिल्म को एक शानदार लुक देते हैं। बैकग्राउंड स्कोर और साउंडट्रैक भावनात्मक दृश्यों को और भी प्रभावशाली बनाते हैं।
इब्राहिम अली खान अपनी पहली फिल्म में ही नेचुरल स्क्रीन प्रेजेंस और गहरे इमोशनल एक्सप्रेशन से प्रभावित करते हैं। खुशी कपूर ने अपने किरदार की जटिल भावनाओं को बखूबी निभाया है। महिमा चौधरी, दिया मिर्जा, सुनील शेट्टी और जुगल हंसराज जैसे सहायक कलाकार कहानी में गहराई जोड़ते हैं, जबकि अर्चना पूरन सिंह का किरदार मजेदार है। वहीं, मीजान जाफरी की झलक दमदार है, और अपूर्व मुखीजा तथा आलिया कुरैशी भी अपने किरदार में जमी हैं।
नादानियां एक शानदार विजुअल अनुभव और भावनात्मक रूप से जुड़ने वाली रोमांटिक ड्रामा फिल्म है, जो अपनी कास्ट की बेहतरीन केमिस्ट्री और दिल छू लेने वाली कहानी के कारण खास बनती है। हालांकि कुछ हिस्सों में फिल्म पूर्वानुमेय लग सकती है, लेकिन इसकी मासूमियत, प्रदर्शन और गहरी भावनाएं इसे एक बार जरूर देखने लायक बनाती हैं।