नई दिल्ली: एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड (“Axis Max Life” / “Company”) ने आज कांतार के साथ साझेदारी में किए गए अपने वार्षिक भरोसा टॉक्स इंडिया रिटायरमेंट इंडेक्स स्टडी के छठे संस्करण (आइरिस 6.0) से महिलाओं के बारे में मिले निष्कर्ष जारी किए।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय स्तर पर महिलाओं की तैयारी में सुधार हुआ है। 50% महिलाओं का कहना है कि वे रिटायरमेंट के लिए खास तौर पर एफडी/आरडी में निवेश करती हैं, जबकि इस मामले में पुरुषों का आंकड़ा 44% है।
इसके साथ ही, महिलाएं कम उम्र में आर्थिक आजादी पाने की चाहत भी रखती हैं। हालांकि, फाइनेंशियल प्लानिंग के बारे में सोचने से लेकर लंबे समय तक जरूरतों को पूरा करने लायक रिटायरमेंट फंड तैयार करने तक का सफर अभी बहुत लंबा है।
आइरिस 6.0 में महिलाओं का स्कोर 49 रहा, जो पुरुषों के बराबर है। महिलाओं की वित्तीय तैयारियों को लेकर स्कोर आइरिस 5.0 के 50 से बढ़कर आइरिस 6.0 में 52 हो गया। वहीं अच्छी सेहत को लेकर तैयारी का स्कोर हल्की गिरावट के साथ 47 से 46 हो गया, जबकि भावनात्मक तैयारी का स्कोर पिछले साल के 58 की तुलना में 57 रहा।
वित्तीय तैयारी में सुधार के साथ-साथ रिटायरमेंट के लिए निवेश करने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है। आइरिस 5.0 में 65% महिलाओं ने रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू किया था, जबकि आइरिस 6.0 में यह आंकड़ा बढ़कर 71% हो गया।
यह वृद्धि पुरुषों में दर्ज बढ़ोतरी से अधिक रही। पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा 68% से बढ़कर 70% हुआ है।
अगर वित्तीय जरूरतें पूरी हो जाएं तो 69% महिलाएं 58–60 वर्ष की पारंपरिक रिटायरमेंट उम्र से पहले ही रिटायर होना चाहती हैं। इनमें से 45% महिलाएं 50 वर्ष की उम्र से पहले आर्थिक आजादी हासिल कर रिटायर होना चाहती हैं।
एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के एमडी एवं सीईओ सुमित मदान ने कहा, “आइरिस 6.0 से मिले निष्कर्ष बताते हैं कि महिलाएं रिटायरमेंट की योजना बनाने के तरीके में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाओं ने रिटायरमेंट के लिए खास तौर पर एफडी/आरडी में निवेश करने की बात कही है। महिलाओं में यह आंकड़ा 50% है, जबकि पुरुषों में 44% है।
वहीं, कई महिलाएं जीवन के शुरुआती चरण में ही आर्थिक आजादी हासिल करने का लक्ष्य भी लेकर चल रही हैं। ये रुझान लंबे समय में वित्तीय भविष्य को लेकर बढ़ती जिम्मेदारी और उनकी आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं।
इसके साथ ही अध्ययन के निष्कर्षों से यह भी सामने आया है कि फाइनेंशियल प्लानिंग करने की चाहत को सतत प्रयासों में बदलना जरूरी है।
समय रहते निवेश शुरू करने, नियमित रूप से निवेश जारी रखने और सोच-समझकर वित्तीय फैसले लेने से महिलाएं एक मजबूत रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकती हैं।
इससे उनका वित्तीय आत्मविश्वास बढ़ेगा और उन्हें अपनी शर्तों पर रिटायरमेंट लेने की आजादी मिलेगी।”
इंडिया रिटायरमेंट इंडेक्स स्टडी 6.0 से महिलाओं के बारे में मिले प्रमुख निष्कर्ष महिलाएं रिटायरमेंट की योजना को लेकर दिखा रही हैं ज्यादा जिम्मेदारी: आधी महिलाओं का मानना है कि कमाई शुरू करते ही रिटायरमेंट की योजना बनानी शुरू कर देनी चाहिए।
यह रिटायरमेंट को लेकर तैयारी के महत्व के बारे में उनकी शुरुआती समझ को दिखाने वाला है। हालांकि, जब रिटायरमेंट के लिए सक्रियता से बचत शुरू करने की आदर्श उम्र के बारे में पूछा गया, तो महिलाओं ने औसतन 32 वर्ष बताई।
पुरुष इसके लिए 31 वर्ष को सही उम्र मानते हैं।
रिटायरमेंट की जरूरतों को लेकर भी बढ़ रही है जागरूकता: 62% महिलाओं को पता है कि रिटायरमेंट के बाद के वर्षों में अपनी मौजूदा लाइफस्टाइल बनाए रखने के लिए उन्हें कितने पैसों की जरूरत होगी। यह आंकड़ा पुरुषों के 61% से थोड़ा अधिक है। आइरिस 5.0 में महिलाओं के बीच यह जागरूकता 61% थी, जो अब बढ़कर 62% हो गई है। वहीं, पुरुषों में यह आंकड़ा 63% से घटकर 61% रह गया है।
रिटायरमेंट फंड को लेकर भरोसा अब भी चुनौती, महिलाएं निवेश के सुरक्षित विकल्पों को देती हैं प्राथमिकता: रिटायरमेंट के लिए निवेश करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ रही है, लेकिन पर्याप्त रिटायरमेंट फंड जुटाने की दिशा में अभी और प्रयास की जरूरत है।
महिलाओं का कहना है कि वे अपने लक्ष्य का औसतन 26% फंड जुटा चुकी हैं। आइरिस 5.0 में यह आंकड़ा 25% था।
हालांकि, यह पुरुषों के 28% के आंकड़े से कम है। वहीं, रिटायरमेंट के बाद 10 साल से अधिक समय तक अपना रिटायरमेंट फंड चलने की उम्मीद करने वाली महिलाओं का अनुपात 40% से घटकर 30% रह गया है।
यह गिरावट पुरुषों के मुकाबले अधिक है, जहां यह आंकड़ा 36% से घटकर 30% हुआ है।
रिटायरमेंट के लिए निवेश के अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्पों को प्राथमिकता देती हैं महिलाएं: 50% महिलाओं का कहना है कि उन्होंने रिटायरमेंट के लिए खास तौर पर एफडी/आरडी में निवेश किया है, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 44% है। वहीं, म्यूचुअल फंड, ईटीएफ, एसआईपी, स्टॉक/शेयर या कमोडिटी जैसे रिस्क बेस्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स (जोखिम आधारित वित्तीय विकल्प) में रिटायरमेंट के लिए निवेश करने वाली महिलाओं का आंकड़ा 27% है, जबकि पुरुषों में यह 34% है।
रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू नहीं कर पाने वाली महिलाओं के सामने सही जानकारी की कमी भी एक बाधा है: 23% महिलाओं का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि निवेश कहां से शुरू करें या कितनी बचत करें। पुरुषों में यह आंकड़ा 19% है।
महिलाओं को बढ़ती उम्र में स्वास्थ्य सही रहने की उम्मीद: हेल्थ प्रिपेयडनेस यानी अच्छी सेहत की तैयारी के इंडेक्स में मामूली गिरावट के बावजूद, 77% महिलाओं को उम्मीद है कि वे रिटायरमेंट के दौरान फिट और स्वस्थ रहेंगी। पुरुषों में यह आंकड़ा 74% है। नियमित रूप से या कभी-कभी प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप कराने वाली महिलाओं का अनुपात 60% है, जो पुरुषों के 59% के लगभग बराबर है।
योग एवं ध्यान की ओर भी महिलाओं का रुझान ज्यादा है। 50% महिलाएं योग या ध्यान करती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 45% और राष्ट्रीय स्तर पर 46% है। इसके अलावा, 41% महिलाओं का कहना है कि वे नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेती हैं। यह आंकड़ा पुरुषों और राष्ट्रीय औसत, दोनों के बराबर है।
भावनात्मक तैयारी की बात करें तो, 84% महिलाओं को पूरी तरह या कुछ हद तक भरोसा है कि रिटायरमेंट के बाद के वर्षों में उन्हें परिवार और दोस्तों की मदद मिलेगी।
आइरिस 5.0 में यह आंकड़ा 86% था। पुरुषों में यह गिरावट अधिक रही, जहां यह आंकड़ा 88% से घटकर 83% हो गया।
वहीं, 82% महिलाओं को चिंता है कि पर्यावरण में हो रहे बदलाव रिटायरमेंट के बाद के वर्षों में उनके शांतिपूर्ण जीवन को प्रभावित कर सकते हैं। पुरुषों में ऐसा मानने वालों का आंकड़ा 80% है।
